राजभाषा का कार्यान्वयन

राजभाषा का कार्यान्वयन
    • Date:

      16 Sep 2026 12:30 PM 16 Sep 2026 05:00 PM

    • Venue:

      Mata Gujri Hall

राजभाषा कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों एवं छात्राओं के मन से हिंदी में सरकारी कार्य करने की झिझक को दूर करना है। इनके माध्यम से e-Office, यूनिकोड और कंप्यूटर टाइपिंग का व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलता है, जिससे दैनिक कार्य सहज हो जाता है। साथ ही, कर्मचारियों को सरकारी नोटिंग, ड्राफ्टिंग और राजभाषा नियमों की सटीक जानकारी प्राप्त होती है, जिससे संसदीय राजभाषा समिति द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में सीधी मदद मिलेगी।

Event Report

माता सुंदरी महिला महाविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन माता सुंदरी महिला महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) की राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति तथा हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 16 सितंबर, 2026 को 'राजभाषा के कार्यान्वयन में हिंदी ई-टूल्स का अनुप्रयोग' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीकी युग में राजभाषा हिंदी के प्रशासनिक एवं व्यावहारिक प्रयोग को डिजिटल माध्यमों की सहायता से अधिक सुगम, त्वरित और प्रभावी बनाना था। कार्यक्रम का कुशल एवं सुव्यवस्थित संचालन राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति के संयोजक डॉक्टर संजय द्वारा किया गया। उन्होंने मंच का संचालन करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। सर्वप्रथम हिंदी विभाग की प्रोफेसर ममता चावला द्वारा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी का बिरवा एवं औपचारिक शब्दों के साथ स्वागत किया गया। तत्पश्चात, प्रोफेसर इंदू कुमारी ने हमारे मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) का पर्यावरण-संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा (बिरवा) भेंट कर भावभीना स्वागत किया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी के आशीर्वचन एवं प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ हुआ। अपने वक्तव्य में प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर ने कहा कि आज के डिजिटल और आधुनिक युग में हिंदी केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बन चुकी है। राजभाषा हिंदी के व्यापक और पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए ई-टूल्स की जानकारी होना समय की मुख्य मांग है। जब तक हम नई तकनीक और डिजिटल माध्यमों को राजभाषा के कार्य में नहीं अपनाएंगे, तब तक हम प्रशासनिक कार्यों को पूर्ण गति प्रदान नहीं कर सकते। इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारी छात्राओं, प्राध्यापकों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में मील का पत्थर साबित होंगी। प्राचार्या के उद्बोधन के पश्चात मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने तकनीकी उपकरणों और सॉफ्टवेयर के माध्यम से राजभाषा हिंदी में कार्य करने की सहज विधियों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाया। मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि अक्सर यह धारणा रहती है कि कंप्यूटर या डिजिटल माध्यमों पर हिंदी में काम करना कठिन है, परंतु वास्तविकता यह है कि आज अनेक ऐसे हिंदी ई-टूल्स उपलब्ध हैं जिन्होंने टंकण, अनुवाद और यूनिकोड आधारित लेखन को अत्यंत सरल बना दिया है। गूगल वॉइस टाइपिंग, कंटैक्स्ट-अवेयर एआई टूल, राजभाषा शब्दकोश और ऑटो-ट्रांसलेशन जैसे माध्यमों का उपयोग करके हम अपने समय की बचत कर सकते हैं और राजभाषा कार्यान्वयन के लक्ष्यों को शत-प्रतिशत प्राप्त कर सकते हैं। हमें भाषा के प्रति संकोच छोड़कर तकनीकी माध्यमों को अपनाना होगा। डॉ. सिंह ने अपने सत्र के दौरान विभिन्न यूनिकोड फ़ॉन्ट्स, स्पीच-टू-टेक्स्ट टूल्स और शासकीय पत्राचार में उपयोगी हिंदी सॉफ्टवेयर का लाइव प्रदर्शन भी किया, जिससे उपस्थित छात्राएं व कर्मचारी सीधे लाभान्वित हुए। सत्र के अंत में हिंदी साहित्य परिषद् की संयोजक डॉक्टर रीता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। डॉक्टर रीता ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम अत्यंत आभारी हैं अपनी प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी के, जिनके निरंतर मार्गदर्शन में ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन संभव हो पाता है। हमारे मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह जी ने जिस सहजता से ई-टूल्स की जटिलताओं को समझाया, उसके लिए हम उनके हृदय से कृतज्ञ हैं। साथ ही, आयोजन समिति, उपस्थित सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं का इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस गरिमामयी एक दिवसीय कार्यशाला में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की प्रभारी प्रोफेसर इंदू कुमारी, वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रोफेसर ममता चावला, राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति की सदस्या डॉक्टर लक्ष्मी देवी के साथ-साथ अन्य विभागों के सम्मानित प्राध्यापक — डॉक्टर सतवीर सिंह, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर जसप्रताप सिंह, डॉक्टर तजिंदरपाल सिंह तथा महाविद्यालय के प्रशासनिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। यह एक दिवसीय कार्यशाला राजभाषा हिंदी के आधुनिक और डिजिटल स्वरूप को समझने की दिशा में अत्यंत फलदायी और ज्ञानवर्धक रही। कार्यशाला ने प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी ज्ञान से समृद्ध किया, बल्कि प्रशासनिक एवं दैनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित भी किया।

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माता सुंदरी महिला महाविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन माता सुंदरी महिला महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) की राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति तथा हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 16 सितंबर, 2026 को 'राजभाषा के कार्यान्वयन में हिंदी ई-टूल्स का अनुप्रयोग' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीकी युग में राजभाषा हिंदी के प्रशासनिक एवं व्यावहारिक प्रयोग को डिजिटल माध्यमों की सहायता से अधिक सुगम, त्वरित और प्रभावी बनाना था। कार्यक्रम का कुशल एवं सुव्यवस्थित संचालन राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति के संयोजक डॉक्टर संजय द्वारा किया गया। उन्होंने मंच का संचालन करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। सर्वप्रथम हिंदी विभाग की प्रोफेसर ममता चावला द्वारा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी का बिरवा एवं औपचारिक शब्दों के साथ स्वागत किया गया। तत्पश्चात, प्रोफेसर इंदू कुमारी ने हमारे मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) का पर्यावरण-संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा (बिरवा) भेंट कर भावभीना स्वागत किया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी के आशीर्वचन एवं प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ हुआ। अपने वक्तव्य में प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर ने कहा कि आज के डिजिटल और आधुनिक युग में हिंदी केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बन चुकी है। राजभाषा हिंदी के व्यापक और पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए ई-टूल्स की जानकारी होना समय की मुख्य मांग है। जब तक हम नई तकनीक और डिजिटल माध्यमों को राजभाषा के कार्य में नहीं अपनाएंगे, तब तक हम प्रशासनिक कार्यों को पूर्ण गति प्रदान नहीं कर सकते। इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारी छात्राओं, प्राध्यापकों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में मील का पत्थर साबित होंगी। प्राचार्या के उद्बोधन के पश्चात मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने तकनीकी उपकरणों और सॉफ्टवेयर के माध्यम से राजभाषा हिंदी में कार्य करने की सहज विधियों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाया। मुख्य वक्ता डॉक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि अक्सर यह धारणा रहती है कि कंप्यूटर या डिजिटल माध्यमों पर हिंदी में काम करना कठिन है, परंतु वास्तविकता यह है कि आज अनेक ऐसे हिंदी ई-टूल्स उपलब्ध हैं जिन्होंने टंकण, अनुवाद और यूनिकोड आधारित लेखन को अत्यंत सरल बना दिया है। गूगल वॉइस टाइपिंग, कंटैक्स्ट-अवेयर एआई टूल, राजभाषा शब्दकोश और ऑटो-ट्रांसलेशन जैसे माध्यमों का उपयोग करके हम अपने समय की बचत कर सकते हैं और राजभाषा कार्यान्वयन के लक्ष्यों को शत-प्रतिशत प्राप्त कर सकते हैं। हमें भाषा के प्रति संकोच छोड़कर तकनीकी माध्यमों को अपनाना होगा। डॉ. सिंह ने अपने सत्र के दौरान विभिन्न यूनिकोड फ़ॉन्ट्स, स्पीच-टू-टेक्स्ट टूल्स और शासकीय पत्राचार में उपयोगी हिंदी सॉफ्टवेयर का लाइव प्रदर्शन भी किया, जिससे उपस्थित छात्राएं व कर्मचारी सीधे लाभान्वित हुए। सत्र के अंत में हिंदी साहित्य परिषद् की संयोजक डॉक्टर रीता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। डॉक्टर रीता ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम अत्यंत आभारी हैं अपनी प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर जी के, जिनके निरंतर मार्गदर्शन में ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन संभव हो पाता है। हमारे मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह जी ने जिस सहजता से ई-टूल्स की जटिलताओं को समझाया, उसके लिए हम उनके हृदय से कृतज्ञ हैं। साथ ही, आयोजन समिति, उपस्थित सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं का इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस गरिमामयी एक दिवसीय कार्यशाला में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की प्रभारी प्रोफेसर इंदू कुमारी, वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रोफेसर ममता चावला, राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति की सदस्या डॉक्टर लक्ष्मी देवी के साथ-साथ अन्य विभागों के सम्मानित प्राध्यापक — डॉक्टर सतवीर सिंह, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर जसप्रताप सिंह, डॉक्टर तजिंदरपाल सिंह तथा महाविद्यालय के प्रशासनिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। यह एक दिवसीय कार्यशाला राजभाषा हिंदी के आधुनिक और डिजिटल स्वरूप को समझने की दिशा में अत्यंत फलदायी और ज्ञानवर्धक रही। कार्यशाला ने प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी ज्ञान से समृद्ध किया, बल्कि प्रशासनिक एवं दैनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित भी किया।